“Han maine Prabhu ko dekha hai” | Yes i have seen the God

“हाँ मैंने प्रभु को देखा है “

(Yes i have seen the God)

(लगाव से)

जैसे माता का शिशु से होता है,
गुरूवर का शिष्य से होता है,
भाई का बहना से होता है,
तितली का फूलों से होता है,
वैसे ही प्रभु का जीवों से होता है,
पर हम ही समझ न पाते हैं,
हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।      
(सुन्दरता से) 
 
जैसे पेड़ों में फल का आना है सुन्दर,
नभ में तारों का जगमग है सुन्दर,
कोयल का गाना है सुन्दर,
शिशु का मुस्कुराना है सुन्दर,
वैसे ही प्राणों में प्रभु का होना है सुन्दर,
पर हम ही समझ न पाते हैं,
हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।
(महत्व से) 
 
क्या फूलों में खुशबू ला सकते,
क्या जल बिन प्राण बचा सकते,
क्या भोजन बिन शक्ति पा सकते,
क्या वायु बिन स्वाँस चला सकते, 
इन सब में प्रभु को पाते हैं,
पर हम ही समझ न पाते हैं,
हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।
(पालन से) 
 
जैसे माता शिशु को रखती है,
उसकी वह चिन्ता करती है, 
उसके लालन और पालन में, 
अपने को भूले रखती है, 
पर जान न पाता शिशु उसको, 
और अपने मन की करता है, 
वैसे ही प्रभु भी करते हैं, 
पर हम ही जान न पाते हैं,
 हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।
(संरक्षण से) 
 
जब घर के सारे सो जाते हैं,
और कुछ जान न पाते हैं,
तब चिन्ता करके अपनों की,
मुखिया उनके जग जाते हैं, 
और चैन से सोते देख के उनको, 
मन से सन्तुष्टि पाते हैं, 
वैसे ही प्रभु भी करते हैं, 
पर मानव जान न पाता है, 
 हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।
(व्यापकता से) 
 
जैसे ऐसा सुन्दर संसार नहीं, 
अम्बर की सीमा का पार नहीं, 
वेदों जैसा कहीं सार नहीं,
सागर जैसा कोई अपार नहीं, 
वैसे ही प्रभु की माया का पार नहीं, 
पर हम ही समझ न पाते हैं,
हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।
(पूर्णता से) 
 
भावों बिन भक्ति अधूरी है,
बगिया बिन पुष्प अधूरी है, 
जल बिन मीन अधूरी है, 
सरिता बिन नीर अधूरी है,
वैसे ही काया बिन प्राण अधूरी है,
पर हम ही समझ न पाते हैं,
 हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है।
(सन्तुष्टि से) 
 
जैसे प्यासे को पानी से मिलती है,
भूखे को भोजन से मिलती है, 
लोभी को माया से मिलती है, 
तपते को छाया से मिलती है,
वैसे ही भक्ति से मिलती है,
पर हम ही समझ न पाते हैं,
 हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है। 
(आवश्यकता से) 

जैसे भूखे को भोजन की जरूरत है,
रोगी को औषधि की जरूरत है, 
प्यासे को जल की जरूरत है, 
शिशु को पोषण की जरूरत है,
वैसे ही प्रभु को भावों की जरूरत है,
 पर हम ही समझ न पाते हैं,
 हाँ, मैंने प्रभु को देखा है, हाँ, मैंने प्रभु को देखा है। 

 

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