मेरा विचार (My Thoughts)
मैं यह महसूस कर रहा हूँ कि अधिकांशतः मनुष्य लगातार अपने होने का, अपनी वास्तविकता का, अपने आचार-विचार का, अपनी वाणी का, अपने कर्मों का बगैर सोंचे-समझे या यों कहें कि गलत तरह से सोंच-समझ कर अपने मूल्यों के ह्रास/पतन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसका कारण शायद कुछ भी हो सकता है, शायद अज्ञानता अथवा ज्ञान होने के बावजूद दूरदर्शिता न रखना आदि और इन्हीं कारणों से मानव मूल्यों में लगातार गिरावट हो रही है। “मानव मूल्यों में लगातार हो रही यह गिरावट उचित नही है, इससे मानवता प्रभावित होती है।” मानव पृथ्वी पर सबसे सुन्दर रचना होने एवं सबसे ऊँचा बौद्धिक स्तर होने का प्रमाण देने में पूर्णतया समर्थ नही हो पा रहा है। विश्व में अनेक समस्याएं विद्यमान होने या नई-नई समस्याओं को जन्म लेने के कारणों में इस तथ्य की भी अहम् भूमिका है।
मानव मूल्यों के अवमूल्यन के प्रमुख कारणों में अज्ञानता अथवा ज्ञान होने के बावजूद भी बगैर सोंचे-समझे, वास्तविकता को जाने अथवा जानकर उसे स्वीकार करे बगैर अपने जीवन के सभी कार्यों को करना ही है।
यदि मानव अपने होने का, अपने जीवन का, अपने जीवन के कार्यों का मूल्यांकन करे बगैर ही अपने मानव होने या बौद्धिक स्तर श्रेष्ठ होने के बारे में केवल सोंचेगा अथवा समझेगा तो लगातार हो रही गिरावट को वह समझ नहीं पायेगा तथा न सजग होगा और न ही उसका उत्थान करने का प्रयास करेगा।
मेरा प्रयास (My Effort)
मैं मानव मूल्यों में आ रही निरन्तर गिरावट से दुखित और इसके प्रति चिंतित रहता हूँ और यही कारण है कि मैंने विचार किया कि मुझे भी इसके प्रति अपने विचार रखने चाहिए। यदि मैं भी इसी प्रकार ही कुछ छोटा सा प्रयास करुँ तो शायद यह मेरी दृष्टि में बड़ा और व्यापक प्रयास होगा।
मैं इस www.searchmyviews.com के माध्यम से आप सभी को मानव मूल्यों के उत्थान हेतु अपने इन्हीं विचारों को हिन्दी भाषा के सरल शब्दों में लेख के माध्यम से परिचय करवाने का प्रयास करता रहूँगा और शायद भविष्य में “कविता” के माध्यम से भी ऐसे विचारों से परिचय कराऊँगा। “ये विचार मेरे स्वयं के हैं जिन्हें मैंने अपने अर्जित ज्ञान, अनुभव एवं आप सभी से सीख कर व्यक्त किये हैं। इनकी तुलना आपके अमूल्य विचारों से कदापि नहीं की जा सकती। शायद इनमें मैं कुछ नया नहीं व्यक्त करूँगा अपितु अपने तरीके से व्यक्त करने की कोशिश करता रहूँगा।” जिनमें मैं ईश्वर, प्रकृति, जगत, जीव, जीवन, आहार-विहार, दैनिक जीवन के कार्यों एवं सामाजिकता आदि से सम्बन्धित अपने विचार रखता रहूँगा। मैं लेखन की निरन्तरता बनाने का अपना पूरा प्रयास करूँगा परन्तु फिर भी यदि लेखों में समयान्तर अधिक हो जाये तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी रहूँगा।
आशा करता हूँ कि आप सभी को भी ये अवश्य पसन्द आयेंगे तथा आप सभी निरन्तर मुझे अपना सहयोग एवं प्रोत्साहन देते रहेंगे।