Actual work of human

 

मनुष्य का वर्तमान कार्य (Current work of human)

वर्तमान समय में जहाँ तक मैं देख और समझ रहा हूँ तो ऐसा प्रतीत होता है कि मनुष्य जैसी विशिष्ट रचना जिसका बौद्धिक स्तर सबसे श्रेष्ठ कहा जाता है, अधिकांशतः वह शायद सब कुछ जानते हुए या अनजाने में अथवा अज्ञान वश ऐसे अनुपयोगी कार्यों में संलग्न होकर अपने मूल्यवान जीवन और समय को व्यर्थ में ही बर्बाद कर रहा है। वह समझ नही पा रहा है कि आखिर उसे क्या और क्यों ये सब करना चाहिए? अनपढ़ अथवा अज्ञानी की बात तो छोड़िये, पढ़े-लिखे और ज्ञानवान व्यक्तियों को ऐसा करते हुए देख कर मैं व्यथित एवं दुखित होता रहता हूँ।
“वर्तमान में अधिकांश मनुष्य एक झूँठी प्रतिस्पर्धा में व्यस्त हैं “, जैसे- किस प्रकार वह कम समय में धनवान हो जाये, कैसे वह दूसरों से आगे निकल जाये, कैसे वह अधिक सम्पत्ति आदि एकत्रित करे। कैसे यह सिद्ध करे कि वह दूसरों से श्रेष्ठ है और कितनी शीघ्रता से ये सब कर सके ताकि वह यह बता सके या दिखा सके कि उसके पास प्रतिस्पर्धी अथवा अन्य से अधिक सारा कुछ है।वह अपना एक अलग स्थान, अपनी एक अलग पहचान पाना चाहता है। वह अपने दायरे को सीमित कर दूरदर्शिता न दिखाते हुए यह सभी कर रहा है। इस प्रतिस्पर्धा में वह यह भी नहीं सोंच पा रहा है कि कहीं यह सब करने में कोई अनैतिक या गलत कार्य के बल पर तो यह सब नही कर रहा है और वास्तव में क्यों अथवा किसलिए यह सब कर रहा है तथा इसकी क्या उपयोगिता है?  

मनुष्य का वास्तविक कार्य(Actual work of human)

जहाँ तक मेरा मानना है कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन एवं रहन -सहन के उत्थान का कार्य अवश्य करना चाहिए और यह उसका कर्तव्य है।” परन्तु यह विचार करना चाहिए कि अपना जीवन जीने में दूसरों से कैसी प्रतिस्पर्धा? यदि जीवन अपना है तो जीना भी अपने को है और किस तरह जीना है यह भी स्वयं ही तय करना है। प्रतिस्पर्धा एक अच्छी बात है परन्तु प्रतिस्पर्धा करते हुए थोड़ा रुक कर पुनः-पुनः विचार करते हुए क्यों और किसलिए आदि का ध्यान रखते हुए, उचित-अनुचित का ध्यान रखते हुए ही कार्यों को करना चाहिए। वांछित धन, सम्पत्ति और वैभव की प्राप्ति के बारे में भी उसे यह अवश्य सोंचना चाहिए कि किस प्रकार सही मार्ग से उसे प्राप्त किया जाये एवं कितनी मात्रा में। उसे यह अवश्य सोंचना चाहिए यदि वह यह सब कर रहा है तो यह सभी के लिए किस प्रकार उपयोगी होगा।
प्रतिस्पर्धा के समय वह यह विचार नहीं करता कि क्या प्रतिस्पर्धी अथवा अन्य भविष्य में उससे आगे निकल गया तो उसके यह सब कार्य व्यर्थ तो नहीं हो जायेंगे, प्रतिस्पर्धा समय की बर्बादी तो नहीं हो जाएगी? क्योंकि समय-समय पर स्थितियाँ -परिस्थितियाँ परिवर्तित होती रहती हैं।
अनेक महापुरुषों का कथन है कि एक सामान्य जीवन के लिए आवश्यक सभी कार्यों हेतु बहुत अधिक धन अथवा अन्य भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता नहीं होती।
इन सबके पीछे सोंचने का मुख्य कारण यह है कि हम अपने जीवन के अमूल्य समय को व्यर्थ ही गवां बैठते हैं। हम यह नहीं सोंचते कि वास्तविक धन, सम्पत्ति तथा वैभव क्या है। यदि हम समझे बगैर व्यर्थ ही अधिकता के पीछे दौड़ लगाते हैं तो ना तो हम अपने परिवार का, ना ही समाज और ना ही कोई अपने मन का अच्छा एवं सुन्दर कार्य कर सकते हैं और न ही आने वाली पीढ़ी को कोई अच्छा सन्देश दे सकते हैं। ऐसे में जीवन की भाग-दौड़ में उचित आहार एवं नियमित दिनचर्या न होने के कारण हमारा स्वास्थ्य भी ख़राब हो जाता है। जबकि एक स्वस्थ्य व्यक्ति ही उपरोक्त सभी प्राप्त भौतिक वस्तुओं का उपयोग /उपभोग कर सकता है। 
प्रश्न है कि मानवता के प्रति, समाज के प्रति, परिवार के प्रति, मानव मूल्यों के उत्थान के प्रति मेरा कोई भी कर्तव्य नही है? हमने किसी भी प्रकार से यदि यह सब प्राप्त कर लिया तो क्या मैं इतनी प्राप्ति के पश्चात् अथवा अपनी आवश्यकता से अधिक प्राप्ति के पश्चात अब भी इतना धनवान अथवा समर्थवान नहीं हुआ हूँ कि मैं भी शायद छोटा सा ऐसा कोई कार्य कर सकता हूँ अथवा करना चाहिए जो सर्वथा उचित एवं सबके लिए उपयोगी हो? यदि नहीं तो अधिक धन संचय अथवा सम्पत्ति आदि का क्या उपयोग होगा। तब विचार करें कि इसे एकत्रित करने में मैंने अपने जीवन के उन अमूल्य क्षणों को व्यर्थ क्यों गवाँया ? क्या इतना ही मनुष्य का जीवन पाने का अथवा श्रेष्ठ बौद्धिक स्तर पाने का उपयोग है?


उपयोगी कार्य (Useful work)
जीवन में तीन बातों का बड़ा ही महत्व है- जानना, मानना और उसको प्रयोग में लाना अथवा उसको करना। प्रत्येक व्यक्ति बहुत कुछ जानता है परन्तु जानते हुए भी वह उसे मानता नही है और यदि किसी प्रकार मान भी लिया तो उसे अपने जीवन में, अपने विचारों में, अपने आचरण में नहीं उतारता है। एक छोटे उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं जैसे- प्रातः काल जागने/उठने के अनेक फायदे हैं यह हम जानते हैं परन्तु फिर भी हम इसे नही मानते हैं और यदि मान भी लिया तो हम जागते/उठते नहीं हैं। इस प्रकार ही यदि हमें पहले से कुछ ज्ञात हो अथवा किसी के द्वारा कोई उपयोगी बात बताई जाये तो जब तक हम उसे जानेंगे ही नहीं तो क्या फ़ायदा और यदि जान गए तो उसे मानेंगे ही नहीं तो भी क्या फ़ायदा और यदि दोनों बातें जानना और मानना हो गया तो उस पर अमल ही नहीं करेंगे या प्रयोग में ही नहीं लायेंगे तो सारी बात ही व्यर्थ हो जाएगी। इसीलिये ही जानना, मानना और अमल में लाना तीनों बातों का जीवन में होना बहुत ही आवश्यक है। इसी से हम सारी बात की शुरुआत कर सकते हैं।
अब हमें यह अवश्य सोंचना चाहिए कि हमें व्यर्थ की प्रतिस्पर्द्धा छोड़कर दूरदर्शिता रखते हुए अपने जीवन में जो कि एक न एक दिन नष्ट हो ही जायेगा, क्या कुछ ऐसा छोटा सा कार्य जो सभी के लिए उपयोगी अथवा सुन्दर हो, करना चाहिए या नही, चाहे धन की अधिकता हो अथवा न हो? यदि आपका उत्तर हाँ है तो आप एक बार ऐसा कार्य अवश्य करके देखिए, आपको अपने आपसे, अपने जीवन से अवश्य सन्तुष्टि/ख़ुशी प्राप्त होगी और अब आपका वास्तविक स्थान आपको अवश्य प्राप्त होगा जो आप झूँठी प्रतिस्पर्द्धा से प्राप्त करना चाहते थे। यदि हाँ तो इन्ही सकारात्मकता से परिपूर्ण विचारों को समझने एवं सीखने का प्रयास अवश्य करना चाहिए ताकि हम अपने मानव होने एवं अपने अमूल्य जीवन को व्यर्थ हो जाने से बचाते हुए इसे मूल्यवान बना सकें। 
मेरी कविता “आओ अब मन की कर लें “ में भी मैंने इसी सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किए हैं, जो शीघ्र ही आप सभी के लिए प्रकाशित करूँगा।
मेरा मानना है कि अंततः प्रत्येक व्यक्ति की अपने जीवन काल में एक सुन्दर अथवा मन को सन्तुष्टि देने वाली कम से कम एक इच्छा अवश्य होती है जिसे वह पूरा करना चाहता है जैसे- सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं का निर्माण, चिकित्सालय निर्माण, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, विद्यालय, धार्मिक स्थल आदि बड़ी इच्छा अथवा कोई छोटी इच्छा जैसे-स्वक्छ्ता का कार्य, भूखों को नियमित भोजन की व्यवस्था, रोगियों को औषधि आदि की व्यवस्था, अन्य सामाजिक कार्य आदि में सहयोग तथा प्रकृति की रक्षा के कार्य आदि। 
‘वर्तमान में अनेक समर्थवान, धनवान व्यक्तियों अथवा जीवन के उद्देश्यों को समझने वाले किसी भी व्यक्ति के द्वारा भी ऐसा करते आप देख -सुन सकते हैं।” 
अतः मनुष्य जैसी विशिष्ट रचना एवं श्रेष्ठ बौद्धिक स्तर होने का प्रमाण देने के लिए इसे समझना आवश्यक है। आइये इन्हीं पहलुओं को कुछ-कुछ समझने का प्रयास आरम्भ करते हैं।  
  
 
 
 
 

 

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