‘‘ मैं आऊॅंगा ‘‘
जब दिल से मुझे पुकारोगे और मेरी राह निहारोगे,
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा
वादा है मेरा आऊॅंगा।
पहले भी मैं ही आया था, आगे भी मैं ही आऊॅंगा,
हर युग में मैं ही आया था, इस युग में मैं ही आऊॅंगा,
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा,
वादा है मेरा आऊॅंगा।
धरती मेरी, अम्बर मेरा, सूरज मेरा, चन्दा मेरा,
वायु मेरी, जल भी मेरा।
जो कुछ भी है, वो सब मेरा, जो कुछ भी है, वो सब मेरा ।
मैं तुझमें हूॅं, तुम मुझमें हो, मैं जैसा हूॅं तुम वैसे
हो।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा,
वादा है मेरा आऊॅंगा।
मैं वेदों में, मैं ग्रन्थों में, मैं रामायण में, मैं गीता
में।
मैं युग-युग से भी ऊपर हूॅं, तुम क्षण भर हो, तुम क्षण
भर हो।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा,
वादा है मेरा आऊॅंगा।
मैं स्वासों में, मैं बुद्धि में, मैं ऋद्धि में, मैं सिद्धि में।
मैं कर्मों में, मैं युक्ति में, मैं बन्धन में, मैं मुक्ति में।
मैं माटी के कण-कण में हूॅं, मैं माटी के कण-कण में
हूूूॅं।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा,
वादा है मेरा आऊॅंगा।
मैं सृजना हॅू, मैं सृजना हूॅं, तुम मेरी ही इक रचना हो।
मैं फल में हूॅं, मैं फूलों में, मैं रंगों में, मैं खुषबू
में।
मैं समय के इक-इक पल में हूॅं, मैं समय के इक-इक पल में
हूॅं।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा,
वादा है मेरा आऊॅंगा।
जिसने-जिसने भी चाहा है, उसने-उसने ही पाया है।
जब दिल से मुझे पुकारोगे, और अपने पास बुलाओगे।
तब दौड़ के मैं आ जाऊॅंगा, मैं अपना रूप दिखाऊॅंगा।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा,
वादा है मेरा आऊॅंगा।
मैं श्रेता में भी आया था, मैं द्वापर में भी आया था।
मैं कलयुग में भी आऊॅंगा, मैं कलयुग में भी आऊॅंगा।
जब-जब तुम नियम बिगाड़ोगे, और दिल से मुझे निकालोगे।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा।
वादा है मेरा आऊॅंगा।
ये ध्यान में रखना तुम अपने
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा।
मैं अपना वचन निभाऊॅंगा।
वादा है मेरा आऊॅंगा।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा।
मै आऊॅंगा, मै आऊॅंगा।